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mahabharat 13.68.4: हे कुन्तीपुत्र! जो मनुष्य नये बैलों से जुते हुए रथ का दान करता है, उसे चाँदी और सोने से सुसज्जित रथ प्राप्त होता है॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.68.4 
उपतिष्ठति कौन्तेय रौप्यकाञ्चनभूषितम्।
शकटं दम्यसंयुक्तं दत्तं भवति चैव हि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! जो मनुष्य नये बैलों से जुते हुए रथ का दान करता है, उसे चाँदी और सोने से सुसज्जित रथ प्राप्त होता है॥4॥
 
O son of Kunti! He who donates a chariot drawn by new bulls receives a chariot decorated with silver and gold. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)