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mahabharat 13.68.39-40h: हे भरतनन्दन! ये गौएँ अपने दूध, दही, घी, गोबर, चमड़ा, हड्डी, सींग और बालों से जगत् की सेवा करती रहती हैं॥39/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  13.68.39-40h 
पयसा हविषा दध्ना शकृता चाथ चमर्णा॥ ३९॥
अस्थिभिश्चोपकुर्वन्ति शृंगैर्वालैश्च भारत।
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! ये गौएँ अपने दूध, दही, घी, गोबर, चमड़ा, हड्डी, सींग और बालों से जगत् की सेवा करती रहती हैं॥39/2॥
 
O Bharatanandan! These cows continue to serve the world with their milk, curd, ghee, dung, leather, bones, horns and hair. ॥ 39/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)