Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.68.34-35h: अतः विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह भूमि का एक छोटा-सा टुकड़ा भी खरीदकर दान कर दे। स्वयं द्वारा खरीदी गई भूमि में पितरों को दिया गया तर्पण सदैव स्थिर रहता है। | mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह भूमि का एक छोटा-सा टुकड़ा भी खरीदकर दान कर दे। स्वयं द्वारा खरीदी गई भूमि में पितरों को दिया गया तर्पण सदैव स्थिर रहता है।
Therefore, a learned man should buy even a small piece of land and donate it. The offering made to ancestors in the land purchased by oneself remains forever stable. 34 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥