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mahabharat 13.68.28-29h: पृथ्वीनाथ! जो विद्वान् मनुष्य होमदान करता है, वह भी अपने पुण्य से इन्द्र के साथ सुखपूर्वक रहता है और स्वर्ग में सम्मानित होता है॥28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  13.68.28-29h 
मुदितो वसति प्राज्ञ: शक्रेण सह पार्थिव॥ २८॥
प्रतिश्रयप्रदानाच्च सोऽपि स्वर्गे महीयते।
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! जो विद्वान् मनुष्य होमदान करता है, वह भी अपने पुण्य से इन्द्र के साथ सुखपूर्वक रहता है और स्वर्ग में सम्मानित होता है॥28 1/2॥
 
Prithvinath! The learned man who gives home donation, also lives happily with Indra by his virtue and is honoured in the heaven. ॥ 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)