Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.68.27-28h: जो मनुष्य अच्छी तरह से सजा हुआ घर और भूमि दान करता है, जो गर्मी, सर्दी और तेज हवा को सहन कर सके, वह स्वर्ग में निवास करता है। उसके पुण्यों का भोग समाप्त हो जाने पर भी वह वहाँ से नहीं हटाया जाता।॥27 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शीतवातातपसहां गृहभूमिं सुसंस्कृताम्॥ २७॥
प्रदाय सुरलोकस्थ: पुण्यान्तेऽपि न चाल्यते।
अनुवाद
जो मनुष्य अच्छी तरह से सजा हुआ घर और भूमि दान करता है, जो गर्मी, सर्दी और तेज हवा को सहन कर सके, वह स्वर्ग में निवास करता है। उसके पुण्यों का भोग समाप्त हो जाने पर भी वह वहाँ से नहीं हटाया जाता।॥27 1/2॥
He who donates a well-decorated house and land that can withstand the heat, cold and strong winds, resides in the heaven. He is not removed from there even after the enjoyment of his good deeds is over.॥ 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥