Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.68.26-27h: जो व्यक्ति जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी दान कर देता है, जिसे खोदकर नष्ट नहीं किया गया हो, वह कभी कठिन संकटों में नहीं पड़ता, और न ही यदि पड़ भी जाए तो कभी दुःखी होता है। 26 1/2 | mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रादेशमात्रं भूमेस्तु यो दद्यादनुपस्कृतम्॥ २६॥
न सीदति स कृच्छ्रेषु न च दुर्गाण्यवाप्नुते।
अनुवाद
जो व्यक्ति जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी दान कर देता है, जिसे खोदकर नष्ट नहीं किया गया हो, वह कभी कठिन संकटों में नहीं पड़ता, और न ही यदि पड़ भी जाए तो कभी दुःखी होता है। 26 1/2
He who donates even a small piece of land that has not been ruined by digging up, never falls into difficult difficulties, nor does he ever feel sad if he does. 26 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥