Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.68.2-3: भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! जो एकाग्र मन से ब्राह्मणों को जूतियाँ दान करता है, वह समस्त काँटों को चूर कर देता है और कठिन से कठिन विपत्तियों पर भी विजय प्राप्त कर लेता है। इतना ही नहीं, वह अपने शत्रुओं के ऊपर विराजमान होता है। प्रजानाथ! उसे अगले जन्म में खच्चरों से खींचा जाने वाला तेजस्वी रथ प्राप्त होता है॥ 2-3॥ | mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
उपानहौ प्रयच्छेद् यो ब्राह्मणेभ्य: समाहित:।
मर्दते कण्टकान् सर्वान् विषमान्निस्तरत्यपि॥ २॥
स शत्रूणामुपरि च संतिष्ठति युधिष्ठिर।
यानं चाश्वतरीयुक्तं तस्य शुभ्रं विशाम्पते॥ ३॥
अनुवाद
भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! जो एकाग्र मन से ब्राह्मणों को जूतियाँ दान करता है, वह समस्त काँटों को चूर कर देता है और कठिन से कठिन विपत्तियों पर भी विजय प्राप्त कर लेता है। इतना ही नहीं, वह अपने शत्रुओं के ऊपर विराजमान होता है। प्रजानाथ! उसे अगले जन्म में खच्चरों से खींचा जाने वाला तेजस्वी रथ प्राप्त होता है॥ 2-3॥
Bhishma said- Yudhishthira! One who donates shoes to Brahmins with a concentrated mind, crushes all the thorns and overcomes even the most difficult adversities. Not only this, he sits on top of his enemies. Prajanath! He gets a bright chariot drawn by mules in his next birth.॥ 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥