श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.67.6 
निदाघकाले पानीयं यस्य तिष्ठत्यवारितम्।
स दुर्गं विषमं कृत्स्नं न कदाचिदवाप्नुते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य ऐसा तालाब बनवाता है जिसका जलस्तर ग्रीष्म ऋतु में भी बना रहता है और कभी कम नहीं होता, उसे कभी भी घोर संकट का सामना नहीं करना पड़ता ॥6॥
 
The person who builds a pond in which the water level remains even during the summers and never decreases, never faces any dire crisis. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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