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श्लोक 13.67.6  |
निदाघकाले पानीयं यस्य तिष्ठत्यवारितम्।
स दुर्गं विषमं कृत्स्नं न कदाचिदवाप्नुते॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य ऐसा तालाब बनवाता है जिसका जलस्तर ग्रीष्म ऋतु में भी बना रहता है और कभी कम नहीं होता, उसे कभी भी घोर संकट का सामना नहीं करना पड़ता ॥6॥ |
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| The person who builds a pond in which the water level remains even during the summers and never decreases, never faces any dire crisis. ॥ 6॥ |
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