श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.67.4 
अर्धं पापस्य हरति पुरुषस्येह कर्मण:।
कूप: प्रवृत्तपानीय: सुप्रवृत्तश्च नित्यश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जिस मनुष्य का कुआँ खोदा गया है और जिसमें से प्रचुर मात्रा में जल बहता रहता है तथा जो सब लोगों के उपयोग के लिए सदैव उपलब्ध रहता है, उसके आधे पाप कुआँ काट लेता है ॥4॥
 
The person whose well is dug and from which water flows in abundance and is always available for use by all the people, takes away half of his sins. ॥ 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd