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श्लोक 13.67.4  |
अर्धं पापस्य हरति पुरुषस्येह कर्मण:।
कूप: प्रवृत्तपानीय: सुप्रवृत्तश्च नित्यश:॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| जिस मनुष्य का कुआँ खोदा गया है और जिसमें से प्रचुर मात्रा में जल बहता रहता है तथा जो सब लोगों के उपयोग के लिए सदैव उपलब्ध रहता है, उसके आधे पाप कुआँ काट लेता है ॥4॥ |
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| The person whose well is dug and from which water flows in abundance and is always available for use by all the people, takes away half of his sins. ॥ 4॥ |
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