Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.67.18: जो मनुष्य ग्रीष्म और वर्षा के महीनों में छाते का दान करता है, उसके मन में कभी कोई शोक नहीं रहता। वह कठिन से कठिन संकटों से भी शीघ्र ही छुटकारा पा लेता है॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निदाघकाले वर्षे वा यश्छत्रं सम्प्रयच्छति।
नास्य कश्चिन्मनोदाह: कदाचिदपि जायते।
कृच्छ्रात् स विषमाच्चैव क्षिप्रं मोक्षमवाप्नुते॥ १८॥
अनुवाद
जो मनुष्य ग्रीष्म और वर्षा के महीनों में छाते का दान करता है, उसके मन में कभी कोई शोक नहीं रहता। वह कठिन से कठिन संकटों से भी शीघ्र ही छुटकारा पा लेता है॥18॥
He who donates umbrellas during the summer and rainy months never has any sorrow in his heart. He soon gets relief from even the most difficult problems.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥