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श्लोक 13.67.12  |
पिपासया न म्रियते सोपच्छन्दश्च जायते।
न प्राप्नुयाच्च व्यसनं करकान् य: प्रयच्छति॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य जल से भरा हुआ घड़ा दान करता है, वह कभी प्यासा नहीं मरता। उसके पास सभी आवश्यक सामग्री रहती है और उसे किसी संकट का सामना नहीं करना पड़ता।॥12॥ |
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| He who donates a water pot filled with water never dies of thirst. He has all the necessary materials with him and does not face any crisis.॥ 12॥ |
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