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mahabharat 13.67.12: जो मनुष्य जल से भरा हुआ घड़ा दान करता है, वह कभी प्यासा नहीं मरता। उसके पास सभी आवश्यक सामग्री रहती है और उसे किसी संकट का सामना नहीं करना पड़ता।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.67.12 
पिपासया न म्रियते सोपच्छन्दश्च जायते।
न प्राप्नुयाच्च व्यसनं करकान् य: प्रयच्छति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य जल से भरा हुआ घड़ा दान करता है, वह कभी प्यासा नहीं मरता। उसके पास सभी आवश्यक सामग्री रहती है और उसे किसी संकट का सामना नहीं करना पड़ता।॥12॥
 
He who donates a water pot filled with water never dies of thirst. He has all the necessary materials with him and does not face any crisis.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)