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mahabharat 13.67.10: जो मनुष्य आश्विन मास में ब्राह्मणों को घी दान करता है, उस पर दिव्य वैद्य अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर उसे यहाँ सौंदर्य प्रदान करते हैं ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 67: सुवर्ण और जल आदि विभिन्न वस्तुओंके दानकी महिमा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.67.10 
घृतं मासे आश्वयुजि विप्रेभ्यो य: प्रयच्छति।
तस्मै प्रयच्छतो रूपं प्रीतौ देवाविहाश्विनौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य आश्विन मास में ब्राह्मणों को घी दान करता है, उस पर दिव्य वैद्य अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर उसे यहाँ सौंदर्य प्रदान करते हैं ॥10॥
 
One who donates ghee to Brahmins in the month of Ashwin, the divine physician Ashwinikumar becomes pleased with him and grants him beauty here. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)