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mahabharat 13.66.4: प्रजानाथ! जब देवकी ने इस प्रकार पूछा, तब नारद मुनि ने उस समय सब बातें विधिपूर्वक कह ​​सुनाईं। मैं भी वही बातें तुमसे कहता हूँ, सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.66.4 
तस्या: सम्पृच्छमानाया देवर्षिर्नारदस्तत:।
आचष्ट विधिवत् सर्वं तच्छृणुष्व विशाम्पते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! जब देवकी ने इस प्रकार पूछा, तब नारद मुनि ने उस समय सब बातें विधिपूर्वक कह ​​सुनाईं। मैं भी वही बातें तुमसे कहता हूँ, सुनो।
 
Prajanath! When Devaki asked in this manner, sage Narad explained everything methodically at that time. I am telling you the same things, listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)