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mahabharat 13.66.23: जो व्यक्ति ज्येष्ठा नक्षत्र में उचित समय पर ब्राह्मणों को सब्जी और मूली का दान करता है, उसे इच्छित समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.66.23 
कालशाकं तु विप्रेभ्यो दत्त्वा मर्त्य: समूलकम्।
ज्येष्ठायामृद्धिमिष्टां वै गतिमिष्टां स गच्छति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति ज्येष्ठा नक्षत्र में उचित समय पर ब्राह्मणों को सब्जी और मूली का दान करता है, उसे इच्छित समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 
A person who makes donation of vegetables and radishes to Brahmins in the Jyeshtha constellation at the appropriate time, attains the desired prosperity and salvation. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)