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mahabharat 13.66.19-20: जो मनुष्य विशाखा नक्षत्र में बैल, दूध देने वाली गायें, अन्न, वस्त्र और गाड़ी आदि का दान करता है, वह देवताओं और पितरों को तृप्त करता है और मृत्यु के बाद शाश्वत सुख भोगता है। उसे जीवन में कभी कोई कष्ट नहीं होता और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग को जाता है।॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  13.66.19-20 
विशाखायामनड्वाहं धेनुं दत्त्वा च दुग्धदाम्।
सप्रासंगं च शकटं सधान्यं वस्त्रसंयुतम्॥ १९॥
पितॄन् देवांश्च प्रीणाति प्रेत्य चानन्त्यमश्नुते।
न च दुर्गाण्यवाप्नोति स्वर्गलोकं च गच्छति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य विशाखा नक्षत्र में बैल, दूध देने वाली गायें, अन्न, वस्त्र और गाड़ी आदि का दान करता है, वह देवताओं और पितरों को तृप्त करता है और मृत्यु के बाद शाश्वत सुख भोगता है। उसे जीवन में कभी कोई कष्ट नहीं होता और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग को जाता है।॥19-20॥
 
He who donates cart-pulling bulls, milk-giving cows, grains, clothes and carts along with other accessories in the Visakha nakshatra, satisfies the gods and ancestors and enjoys eternal happiness after death. He never faces any trouble during his life and after death goes to heaven.॥19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)