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mahabharat 13.66.15: उत्तरा नक्षत्र में मनुष्य जो भी दान देता है, शास्त्रों का ऐसा निश्चय है कि वह अक्षय और महान फलों से युक्त होता है।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.66.15 
यद् यत् प्रदीयते दानमुत्तराविषये नरै:।
महाफलमनन्तं तद् भवतीति विनिश्चय:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उत्तरा नक्षत्र में मनुष्य जो भी दान देता है, शास्त्रों का ऐसा निश्चय है कि वह अक्षय और महान फलों से युक्त होता है।॥15॥
 
Whatever charity a person gives during the Uttara Nakshatra, it is the determination of the scriptures that it is eternal and full of great fruits.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)