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mahabharat 13.66.10: पुष्य नक्षत्र में स्वर्णाभूषण अथवा केवल स्वर्ण का दान करने से दाता प्रकाशहीन संसार में भी चन्द्रमा के समान चमकता है ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 66: विभिन्न नक्षत्रोंके योगमें भिन्न-भिन्न वस्तुओंके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.66.10 
पुष्येण कनकं दत्त्वा कृतं वाकृतमेव च।
अनालोकेषु लोकेषु सोमवत् स विराजते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पुष्य नक्षत्र में स्वर्णाभूषण अथवा केवल स्वर्ण का दान करने से दाता प्रकाशहीन संसार में भी चन्द्रमा के समान चमकता है ॥10॥
 
By donating a gold ornament or just gold in the Pushya Nakshatra, the donor shines like the moon even in the lightless world. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)