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श्लोक 13.65.52  |
एते लोका: पुण्यकृता अन्नदानां महात्मनाम्।
तस्मादन्नं प्रयत्नेन दातव्यं मानवैर्भुवि॥ ५२॥ |
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| अनुवाद |
| ये पुण्यात्मा लोग अन्नदान करके लोक को प्राप्त होते हैं। अतः इस पृथ्वी पर सभी मनुष्यों को अन्नदान का प्रयत्न करना चाहिए ॥52॥ |
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| These virtuous people attain the world by donating food. Therefore, all human beings on this earth should make efforts to donate food. 52॥ |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि अन्नदानप्रशंसायां त्रिषष्टितमोऽध्याय:॥ ६३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें अन्नदानकी प्रशंसाविषयक तिरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६३॥
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