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mahabharat 13.65.50: वहाँ खाने-पीने की वस्तुओं, वस्त्रों और आभूषणों के पहाड़ हैं। वहाँ दूध से भरी नदियाँ बहती हैं। वहाँ पहाड़ों के समान अन्न के ढेर लगे हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.65.50 
भक्ष्यभोज्यमया: शैला वासांस्याभरणानि च।
क्षीरं स्रवन्ति सरितस्तथा चैवान्नपर्वता:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ खाने-पीने की वस्तुओं, वस्त्रों और आभूषणों के पहाड़ हैं। वहाँ दूध से भरी नदियाँ बहती हैं। वहाँ पहाड़ों के समान अन्न के ढेर लगे हैं।
 
There are mountains of edible items, clothes and ornaments. The rivers there flow with milk. There are heaps of food grains like mountains. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)