श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.65.49 
वाप्यो वीथ्य: सभा: कूपा दीर्घिकाश्चैव सर्वश:।
घोषवन्ति च यानानि युक्तान्यथ सहस्रश:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उन घरों में नाना प्रकार की बावड़ियाँ, गलियाँ, सभा भवन, कुएँ, तालाब तथा हजारों रथ जुते हुए तथा ऊँची आवाज करते हुए खड़े रहते हैं।
 
In those houses there are various kinds of stepwells, lanes, assembly halls, wells, ponds and thousands of chariots harnessed and making loud noises, etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)