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mahabharat 13.65.45: हे मनुष्यों के स्वामी! मैं तुम्हें अन्नदान करने वालों को प्राप्त होने वाले लोकों के विषय में बताता हूँ। सुनो। उन महान् हृदय वाले अन्नदाताओं के घर स्वर्ग में प्रकाशित होते रहते हैं।॥45॥   |   mahabharat अध्याय 13.65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  13.65.45 
अन्नदानां हि ये लोकास्तांस्त्वं शृणु जनाधिप।
भवनानि प्रकाशन्ते दिवि तेषां महात्मनाम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मैं तुम्हें अन्नदान करने वालों को प्राप्त होने वाले लोकों के विषय में बताता हूँ। सुनो। उन महान् हृदय वाले अन्नदाताओं के घर स्वर्ग में प्रकाशित होते रहते हैं।॥45॥
 
O Lord of men! I am going to tell you about the worlds attained by those who donate food. Listen. The houses of those great-hearted food-donors keep getting illuminated in heaven. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)