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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य
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श्लोक 42
श्लोक
13.65.42
प्राणान् ददाति भूतानां तेजश्च भरतर्षभ।
गृहमभ्यागतायाथ यो दद्यादन्नमर्थिने॥ ४२॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जो अपने घर आए हुए याचक को भोजन कराता है, वह समस्त प्राणियों को जीवन और शक्ति का दान देता है ॥ 42॥
O best of the Bharatas! He who gives food to a beggar who comes to his home, donates life and energy to all creatures. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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