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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य
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श्लोक 41
श्लोक
13.65.41
एवमन्नाद्धि सूर्यश्च पवन: शुक्रमेव च।
एक एव स्मृतो राशिस्ततो भूतानि जज्ञिरे॥ ४१॥
अनुवाद
इस प्रकार सूर्य, वायु और वीर्य ये ही अन्न से उत्पन्न हुए तत्त्व हैं और सम्पूर्ण जीव उन्हीं से उत्पन्न हुए हैं॥ 41॥
In this way, the sun, air and semen are the same elements which have emerged from food. All living beings have originated from them.॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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