श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.65.4 
भीष्म उवाच
इममर्थं पुरा पृष्टो नारदो देवदर्शन:।
यदुक्तवानसौ वाक्यं तन्मे निगदत: शृणु॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले- युधिष्ठिर! मैंने एक बार पहले भी देवऋषि नारद से यही बात पूछी थी। उस समय उन्होंने मुझसे जो कुछ कहा था, वही मैं तुमसे कह रहा हूँ, सुनो।
 
Bhishma said- Yudhishthira! I had asked the same thing to the divine sage Narada once before. I am telling you whatever he had told me at that time, listen.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd