श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.65.39 
तत: सस्यानि रोहन्ति येन वर्तयते जगत‍्।
मांसमेदोऽस्थिशुक्राणां प्रादुर्भावस्तत: पुन:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
फिर उस गीली धरती से अन्न के अंकुर उत्पन्न होते हैं, जो संसार के प्राणियों का पोषण करते हैं। अन्न से ही शरीर में मांस, आटा, हड्डियाँ और वीर्य उत्पन्न होते हैं ॥39॥
 
Then from that wet earth sprouts of grains arise, which provide sustenance to the living beings of the world. It is from food that meat, flour, bones and semen are produced in the body. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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