श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.65.30 
अन्नाद्धि प्रसवं यान्ति रतिरन्नाद्धि भारत।
धर्मार्थावन्नतो विद्धि रोगनाशं तथान्नत:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भारत! अन्न से ही सन्तान उत्पन्न होती है। अन्न से ही सुख प्राप्त होता है। समझो कि अन्न से ही धर्म और अर्थ की प्राप्ति होती है। अन्न से ही रोगों का नाश होता है ॥30॥
 
Bharat! Children are born from food. It is from food that one attains happiness. Understand that Dharma (religion) and Artha (wealth) are attained from food. Diseases are destroyed from food. ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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