श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.65.19 
अन्नदस्यान्नवृक्षाश्च सर्वकामफलप्रदा:।
भवन्ति चेह चामुत्र नृपतेर्नात्र संशय:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि जो राजा अन्नदान करता है, वह अन्न उसे इस लोक में तथा परलोक में भी समस्त वांछित फल प्रदान करता है ॥19॥
 
There is no doubt that for a king who donates food grains, the food grains provide him with all the desired fruits in this world as well as the next. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)