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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य
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श्लोक 18
श्लोक
13.65.18
न पृच्छेद् गोत्रचरणं स्वाध्यायं देशमेव च।
भिक्षितो ब्राह्मणेनेह दद्यादन्नं प्रयाचित:॥ १८॥
अनुवाद
यदि कोई ब्राह्मण भोजन मांगे तो उससे उसका वंश, संप्रदाय, वेद-अध्ययन, निवास स्थान आदि न पूछें; उसे तुरंत भोजन करा दें॥18॥
If a Brahmin begs for food, do not ask him about his lineage, sect, study of Vedas, place of residence etc.; offer him food immediately.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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