| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 65: अन्नदानका विशेष माहात्म्य » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 13.65.11  | श्रान्तमध्वनि वर्तन्तं वृद्धमर्हमुपस्थितम्।
अर्चयेद् भूतिमन्विच्छन् गृहस्थो गृहमागतम्॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | यदि कोई वृद्ध एवं थका हुआ यात्री तुम्हारे घर आए, तो अपने कल्याण की इच्छा रखने वाले गृहस्थ को चाहिए कि वह उस आदरणीय अतिथि का सत्कार करे ॥11॥ | | | | If an old and tired traveller comes to your house, a householder seeking his own welfare should honour that respected guest. ॥11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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