श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.64.d1 
(एकागारकरीं दत्त्वा षष्टिसाहस्रमूर्ध्वग:।
तावत्या हरणे पृथ्व्या नरकं द्विगुणोत्तरम्॥ )
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति घर बनाने लायक ज़मीन दान करता है, वह स्वर्गलोक में साठ हज़ार साल तक रहता है। और जो उतनी ही ज़मीन हड़प लेता है, उसे दोगुने समय तक नरक में रहना पड़ता है।
 
He who donates land enough to build a house, lives in the heavenly world for sixty thousand years. And he who usurps the same amount of land has to live in hell for twice that long.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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