श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  13.64.94 
य इदं श्रावयेच्छ्राद्धे भूमिदानस्य सम्भवम्।
न तस्य रक्षसां भागो नासुराणां भवत्युत॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य श्राद्ध के समय पृथ्वी दान करने के इस माहात्म्य को सुनता है, उसके द्वारा श्राद्ध में दिया गया भाग राक्षस और पिशाच नहीं ले पाते ॥94॥
 
The man who listens to this significance of donating the earth at the time of the Shraddha ceremony, the demons and devils are not able to take the share offered by him in the Shraddha ceremony. ॥94॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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