श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  13.64.93 
भीष्म उवाच
एतदांगिरसाच्छ्रुत्वा वासवो वसुधामिमाम्।
वसुरत्नसमाकीर्णां ददावांगिरसे तदा॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! बृहस्पति से भूमिदान का माहात्म्य सुनकर इन्द्र ने धन-धान्य से परिपूर्ण पृथ्वी उन्हें दान कर दी।
 
Bhishma says - O King! On hearing the significance of the donation of land from Brihaspati, Indra donated the earth filled with wealth and gems to him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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