श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  13.64.90 
भूमिप्रदानात् पुष्पाणि हिरण्यनिचयास्तथा।
आज्ञा सदाप्रतिहता जयशब्दा वसूनि च॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
भूमिदान करने से मनुष्य को सुन्दर पुष्प, स्वर्ण के भण्डार, कभी चुनौती न देने वाली आज्ञाएँ, विजयसूचक वचन तथा नाना प्रकार के धन और रत्न प्राप्त होते हैं ॥90॥
 
By donating land, a man receives beautiful flowers, stores of gold, commands that are never challenged, words of victory and various kinds of wealth and precious stones. ॥90॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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