श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  13.64.9-10 
पुनाति दत्ता पृथिवी दातारमिति शुश्रुम॥ ९॥
अपि पापसमाचारं ब्रह्मघ्नमपि चानृतम्।
सैव पापं प्लावयति सैव पापात् प्रमोचयेत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हमने सुना है कि दान में दी गई भूमि दानकर्ता को पवित्र कर देती है। चाहे वह कितना ही बड़ा पापी, ब्रह्महत्यारा या मिथ्याचारी क्यों न हो, दान में दी गई भूमि दानकर्ता के पापों को धोकर उसे पापों से पूर्णतः मुक्त कर देती है।॥9-10॥
 
We have heard that the land given in charity purifies the donor. No matter how big a sinner, brahmin-killer or liar he may be, the land given in charity washes away the sins of the donor and makes him completely free from sins.॥ 9-10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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