श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  13.64.89 
उपतिष्ठन्ति पुण्यानि सदा भूमिप्रदं नरम्।
शङ्खभद्रासनं छत्रं वराश्वा वरवाहनम्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
भूमिदान करने वाला मनुष्य अपने पुण्य कर्मों के फलस्वरूप सदैव शंख, सिंहासन, छत्र, उत्तम घोड़े और उत्तम वाहन पाता है ॥89॥
 
A person who donates land always gets a conch, throne, umbrella, good horses and best vehicles as a result of his good deeds. 89॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)