श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  13.64.88 
शतमप्सरसश्चैव दिव्यमाल्यविभूषिता:।
उपतिष्ठन्ति देवेन्द्र ब्रह्मलोके धराप्रदम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
हे देवराज! ब्रह्मलोक में भूमिदान करने वाले पुरुष की सेवा में सैकड़ों दिव्य अप्सराएँ मालाओं से सुसज्जित होकर प्रकट होती हैं।
 
King of the gods! Hundreds of celestial nymphs adorned with garlands appear in the service of a person who donates land in Brahmaloka. 88.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)