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श्लोक 13.64.80  |
भूमिपालं च्युतं राष्ट्राद् यस्तु संस्थापयेन्नर:।
तस्य वास: सहस्राक्ष नाकपृष्ठे महीयते॥ ८०॥ |
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| अनुवाद |
| हे इन्द्र! जो मनुष्य राज्य से गिरे हुए राजा को पुनः सिंहासन पर बिठाता है, वह स्वर्ग में निवास करता है और वहाँ महान् सम्मान प्राप्त करता है ॥80॥ |
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| Indra! The person who restores a king who has fallen from his reign to his throne, resides in heaven and receives great respect there. ॥ 80॥ |
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