श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  13.64.73 
अग्निष्टोमप्रभृतिभिरिष्ट्वा च स्वाप्तदक्षिणै:।
न तत्फलमवाप्नोति भूमिदानाद् यदश्नुते॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
अग्निष्टोम आदि यज्ञों को बहुत दक्षिणा सहित करने पर भी मनुष्य को वह फल नहीं मिलता जो भूमिदान से मिलता है ॥ 73॥
 
Even after performing Yajnas like Agnishtom etc. with lot of Dakshina, a man does not get the benefit which he gets by donating land. ॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)