श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  13.64.71 
तडागान्युदपानानि स्रोतांसि च सरांसि च।
स्नेहान् सर्वरसांश्चैव ददाति वसुधां ददत्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, पृथ्वी का दान करने वाले मनुष्य को तालाब, कुआं, झरना, सरोवर, स्नेह (घी आदि) तथा सभी प्रकार के रसों के दान का फल भी प्राप्त होता है।
 
Not only this, a person who donates the earth also gets the fruits of donating a pond, well, waterfall, lake, affection (ghee etc.) and all kinds of juices. 71.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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