श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.64.7 
य एतां दक्षिणां दद्यादक्षयां राजसत्तम।
पुनर्नरत्वं सम्प्राप्य भवेत् स पृथिवीपति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ! जो इस अक्षय अंश का दान करता है, वह अगले जन्म में मनुष्य बनकर पृथ्वी का स्वामी बनता है॥7॥
 
The best! The one who donates this inexhaustible role becomes the master of the earth by becoming a human being in the next birth. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)