श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  13.64.66 
ददाति य: समुद्रान्तां पृथिवीं शस्त्रनिर्जिताम्।
तं जना: कथयन्तीह यावद् भवति गौरियम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
जो समुद्रपर्यन्त पृथ्वी को शस्त्रों द्वारा जीतकर दान कर देता है, जब तक यह पृथ्वी रहती है, संसार के लोग उसी का यश गाते हैं ॥ 66॥
 
He who conquers the earth up to the sea with weapons and gives it in charity, his fame is sung by the people of the world as long as this earth exists. ॥ 66॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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