श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  13.64.63 
सर्वकामदुघां धेनुं सर्वकामगुणान्विताम्।
ददाति य: सहस्राक्ष स्वर्गं याति स मानव:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
सहस्राक्ष! जो सम्पूर्ण कामनाओं को देने वाली और समस्त इच्छित गुणों से युक्त कामधेनु रूपी पृथ्वी का दान करता है, वह मनुष्य स्वर्ग को जाता है॥63॥
 
Sahasraksh! The one who donates the earth in the form of Kamadhenu, which grants all the desires and is full of all the desired qualities, goes to human heaven. 63॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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