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श्लोक 13.64.60  |
रत्नोपकीर्णां वसुधां यो ददाति पुरंदर।
स मुक्त: सर्वकलुषै: स्वर्गलोके महीयते॥ ६०॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुरन्दर! जो मनुष्य रत्नजटित पृथ्वी का दान करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में प्रतिष्ठित होता है ॥60॥ |
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| Purandara! One who makes donation of the earth studded with gems, becomes free from all sins and is honoured in the heaven. ॥ 60॥ |
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