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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद
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श्लोक 60
श्लोक
13.64.60
रत्नोपकीर्णां वसुधां यो ददाति पुरंदर।
स मुक्त: सर्वकलुषै: स्वर्गलोके महीयते॥ ६०॥
अनुवाद
हे पुरन्दर! जो मनुष्य रत्नजटित पृथ्वी का दान करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में प्रतिष्ठित होता है ॥60॥
Purandara! One who makes donation of the earth studded with gems, becomes free from all sins and is honoured in the heaven. ॥ 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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