श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.64.59 
पञ्च पूर्वा हि पुरुषा: षडन्ये वसुधां गता:।
एकादश ददद्भूमिं परित्रातीह मानव:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इस लोक में भूमि का दान करता है, वह अपने पाँच पीढ़ी तक के पितरों को और पृथ्वी पर आने वाली अपनी संतानों को छः पीढ़ी तक - इस प्रकार कुल ग्यारह पीढ़ियों तक - मुक्ति प्रदान करता है ॥59॥
 
A person who donates land in this world liberates his forefathers up to five generations and his children coming on earth up to six generations - thus a total of eleven generations. ॥ 59॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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