vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद
»
श्लोक 54
श्लोक
13.64.54
भीष्म उवाच
इत्युक्त: स सुरेन्द्रेण ततो देवपुरोहिता:।
बृहस्पतिर्बृहत्तेजा: प्रत्युवाच शतक्रतुम्॥ ५४॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भरत! जब देवराज इन्द्र ने ऐसा कहा, तब देवताओं के पुरोहित तथा महाबली बृहस्पति ने उन्हें इस प्रकार उत्तर दिया।
Bhishma says - Bharata! When Devraja Indra said this, the priest of the gods and the mighty Brihaspati replied to him in this manner. 54.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×