श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  13.64.54 
भीष्म उवाच
इत्युक्त: स सुरेन्द्रेण ततो देवपुरोहिता:।
बृहस्पतिर्बृहत्तेजा: प्रत्युवाच शतक्रतुम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - भरत! जब देवराज इन्द्र ने ऐसा कहा, तब देवताओं के पुरोहित तथा महाबली बृहस्पति ने उन्हें इस प्रकार उत्तर दिया।
 
Bhishma says - Bharata! When Devraja Indra said this, the priest of the gods and the mighty Brihaspati replied to him in this manner. 54.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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