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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद
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श्लोक 51
श्लोक
13.64.51
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
बृहस्पतेश्च संवादमिन्द्रस्य च युधिष्ठिर॥ ५१॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! इस विषय में विद्वान पुरुष इन्द्र और बृहस्पति के संवाद रूपी इस प्राचीन कथा का उदाहरण देते हैं ॥ 51॥
Yudhishthira! In this matter learned persons cite the example of this ancient story in the form of the dialogue between Indra and Brihaspati. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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