श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.64.49 
भूमौ जायन्ति पुरुषा भूमौ निष्ठां व्रजन्ति च।
चतुर्विधो हि लोकोऽयं योऽयं भूमिगुणात्मक:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
सभी प्राणी पृथ्वी पर जन्म लेते हैं और पृथ्वी में ही विलीन हो जाते हैं। चारों प्रकार के प्राणियों - अण्डज, जराज, स्वेद और वनस्पति - के शरीर पृथ्वी की ही रचना हैं।
 
All beings are born on the earth and merge into the earth. The bodies of all the four kinds of beings - oviparous, viviparous, sweat-born and plant-born - are the creation of the earth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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