श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  13.64.45 
स कुलीन: स पुरुष: स बन्धु: स च पुण्यकृत्।
स दाता स च विक्रान्तो यो ददाति वसुन्धराम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जो पृथ्वी का दान करता है, वह श्रेष्ठ पुरुष, पुरुषार्थी, मित्र, पुण्यात्मा, दानी और पराक्रमी होता है ॥ 45॥
 
He who donates the earth is a noble man, a man, a friend, a virtuous soul, a donor and a mighty man. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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