श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  13.64.43 
अथ येषां पुन: प्राज्ञो राजा भवति धार्मिक:।
सुखं ते प्रतिबुध्यन्ते सुसुखं प्रस्वपन्ति च॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जिनका राजा बुद्धिमान और धर्मात्मा है, वे सुख से सोते हैं और सुख से जागते हैं ॥ 43॥
 
But those whose king is wise and righteous, they sleep comfortably and wake up comfortably. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)