श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 64: सब दानोंसे बढ़कर भूमिदानका महत्त्व तथा उसीके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.64.39 
अभिषिच्यैव नृपतिं श्रावयेदिममागमम्।
यथा श्रुत्वा महीं दद्यान्नादद्यात् साधुतश्च ताम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
राजा का राज्याभिषेक करके उसे तुरन्त पृथ्वी द्वारा गायी गयी यह कथा सुनानी चाहिए, जिससे वह अपनी भूमि दान कर दे और पुण्यात्माओं के हाथों से दी हुई भूमि को छीन न ले। 39.
 
After anointing the king on the throne, he should immediately be made to listen to this tale sung by the Earth so that it may donate its land and may not snatch away the land given to the virtuous by their hands. 39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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